रायपुर की फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट, तीन मजदूरों की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बेंद्री की एक निजी फैक्ट्री में मंगलवार शाम हुए भीषण विस्फोट में तीन मजदूरों की मौत हो गई। धमाका इतना तेज था कि घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और फैक्ट्री परिसर में भारी नुकसान हुआ। घटना उरला थाना क्षेत्र की है।

मृतकों में जांजगीर-चांपा निवासी 17 वर्षीय अरुण पांडे, मध्यप्रदेश के डिंडौरी निवासी लाल सिंह तथा 25 वर्षीय कमल सिंह शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, हादसे के समय अरुण यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर बदल रहा था। विस्फोट में लाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल कमल सिंह ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एफएसएल और श्रम विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों के पालन और कार्य परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के जोखिम भरे कार्यों में लगाया जाता था और सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जाते थे। कुछ मजदूरों का कहना है कि उन्हें सीधे भट्ठी और टेपिंग यूनिट में काम पर लगा दिया गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट के समय फैक्ट्री परिसर के एक हिस्से में कुछ मजदूर भोजन तैयार कर रहे थे। अचानक हुए धमाके के बाद कुछ देर तक पूरे परिसर की बिजली भी बाधित रही।

मृतकों में शामिल अरुण पांडे के परिजनों ने आरोप लगाया है कि नाबालिग होने के बावजूद उससे खतरनाक औद्योगिक कार्य कराया जा रहा था। इस मामले में पुलिस नाबालिग श्रमिक से काम कराए जाने के पहलू की भी जांच कर रही है।

वर्ष 2005 से संचालित यह औद्योगिक इकाई धातु और औद्योगिक उत्पादों के निर्माण से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस और संबंधित विभाग अब विस्फोट के कारणों, सुरक्षा प्रबंधन और श्रम नियमों के पालन की विस्तृत जांच कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, खतरनाक उद्योगों और फैक्ट्रियों में नाबालिगों से कार्य कराना कानूनन प्रतिबंधित है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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